चंद लम्हे तेरा बेसब्री से इंतज़ार किया
वो इंतज़ार अच्छा
था तेरे आने पर सुन कर तेरी दास्ताँ
हम रोये इतना गर तू न आता
तेरे इंतज़ार में जीतेतो इंतज़ार अच्छा
था किस्से तेरी बेवफाई के न सुनते
तो इंतज़ार अच्छा था
तकते थे तेरी राहों को पलके बिछाए
हम तू चला आता तो इंतज़ार अच्छा था
पर तेरा इंतज़ार तेरे आने से अच्छा
था तू ना आता तो तेरा इंतज़ार अच्छा था
Monday, February 18, 2008
Thursday, February 14, 2008
दस्तक
जाने क्या सोच कर तेरे दर पर दस्तक दी
मालूम था की तू सामने न आयगा फिर भी दस्तक
दी शायद एक आस थी दिल में की तू चला आए
तेरे दीदार को तरसे हम जितना तू भी तरसा होगा
यही सोच कर दस्तक दी
दर खुला नज़र तू न आया
आँखे ख़ुद ब ख़ुद झुक
गई कदमों ने बढ़ना चाहा पर इजाजत न मिली
तू शायद सामने
आए यही सोच कर फिर दस्तक दी
पूछने पर तेरे गुजर जाने का मालूम हुआ
तेरी मैयत पर आए आ कर दस्तक दी
शायद कयामत में मिले यही सोच कर दस्तक दी
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